3D Printing Kya Hai – 3d तकनीक क्या है – 3D प्रिंटिंग और सामान्य प्रिंटिंग में क्या अंतर है?

जैसे की हमने आपको पिछले आर्टिकल में बताया है की Logo kaise Banaye बिजनेस के लिए और आज के इस आर्टिकल में हम चर्चा करने वाले है 3D Printing Kya होता है के बारे में इसलिए इस आर्टिकल को अंत तक पढ़े.

हम सभी को तो ये पता ही है विज्ञान और प्रौद्योगिकी के इस युग में अनेक क्रांतिकारी बदलाव हुए हैं, और इस प्रकार के बदलाव Printing के क्षेत्र में भी हुए है। आज 3D अर्थातत्री-आयामीप्रिंटिंग इसी का एक उदाहरण है तो आज हम 3D Printing से जुड़े कुछ सवालों के बारे में चर्चा करते हैं।

3D प्रिंटिंग क्या है

3D प्रिंटिंग मुख्य रूप से manufacturing की एक नई तकनीक है जिसका प्रयोग 3D imensional अर्थात्त्री आयामी वस्तुओं के निर्माण में किया जाता है। यह कम समय, कम खर्च से वस्तुओं को भौतिक रूप देने में समर्थ होती है।

3D Printing काम कैसे करती है

3D Printing के लिए सबसे पहले designing software की मदद से डिजाइन तैयार करते हैं, इसके बाद slicing software की मदद से उस डिजाइन को सला इसमें बांटा जाता है और फिर फाइल को जी-कोड में कन्वर्टकर के परत दर परत 3D Printing की जाती है।

3D प्रिंटिंग के कितने प्रकार हैं

3D Printing मुख्य रूप से सात प्रकार की होती है जिस के बारे में हम आज जानेंगे

3d Printer

3d printing software

  1. Vat photopolymerisation
  2. Material jetting
  3. Binder jetting
  4. Material extrusion
  5. Power bed fusion
  6. Sheet lamination
  7. Direct energy deposition

Vat photopolymerisation: कोई भी एक 3D Printing vat photopolymerisation तकनीक पर आधारित होता है। इस प्रक्रिया में एक कंटेनर लिया जाता है जिसे photopolymer resin से भरा जाता है और उसे यूवी लाइट की मदद से harden किया जाता है इस प्रक्रिया में अंतिम रूप से 3D Printing प्राप्त की जाती है।

Material jetting: इस प्रक्रिया में एक छोटी सी नोजलली के द्वारा मटेरियल को ड्रोपलट्स में बदलकर परत दर परत अप्लाई किया जाता है इसे फिर यूवी लाइट की मदद से harden किया जाता है और फिर एक 3D Printing प्राप्त की जाती है।

Binder jetting: बिनडर जेटीग में मुख्य रूप से दो मटेरियल का उपयोग किया जाता है इस में से पहला पाउडर बेस मटेरियल होता है और दूसरा लिक्वड बिंडर। इसमें सबसे पहले एक बिल्डचैंबर लेते हैं जिसमें पाउडर को फैलाया जाता है और फिर उस पर बिडर को एप्लाई किया जाता है और अंतिम में जेटनो जल के द्वारा इसे ग्लूकर 3D Printing प्राप्त की जाती है।

material extrusion: आम तोर पर इस तकनीक का इस्तेमाल अधिक होता है जिसमें फ्यूज्डदेपोसितियन मॉडलिंग (fdm) अधिक लोकप्रिय है इसतकनीक में प्लास्टिक फिलामेंट या मेटलवायर का उपयोग किया जाता है। प्लास्टिक फिलामेंट या मेटलवायर को एक कोयल में अनवाउड किया जाता है। उसमे एक एक्स्ट्रूजननोजल लगा होता है जो मटेरियल सप्लाई का कार्य करता हैं। उसमे मटेरियल को मेल्ट करने के लिए नोजल को गर्म किया जाता है फिर इस प्रोसेस के माध्यम से 3D आकृति प्राप्त की जाती है।

power bed fusion: Power bed fusion 3D Printing की एक महत्वपर्ण तकनीक है जो मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं.

  • सेलेक्टिव लेजर सिंटरिंग: इसमें अत्याधिक हाई पॉवर लेजर का उपयोग किया जाता है। इस तकनीक में प्लास्टिक के छोटे छोटे पार्टिकल्स, ग्लास पावडर, सेरामिक को एक साथ जोड़ने के लिए 3D आकृति ली जाती है। इस प्रक्रिया में लेजर के द्वारा पाउडर मटेरियल को फ्यूज किया जाता है, और अंततः एक 3D आकृति प्राप्त की जाती हैं।
  • डायरेक्टमेटल लेजर सिंटरिग: यह तकनीक कभी sls के समान ही होती है, परन्तु इसमें प्लास्टिक मेटल या ग्लास के स्थान पर सभी प्रकार के unused powder  का उपयोग किया जाता है, साथ ही इसमें किसी सपोर्टस्ट्रक्चर की जरूरत नहीं पड़ती।
  • sheet lamination: सिट लेमिनेशन की प्रक्रिया में सीट के मटेरियल को एक साथ जोड़ा जाता है। यहां हम कोई भी सीट ले सकते हैं। ये सिट मेटल या पेपर की हो सकती है, यहां मेटलसीट अधिक लोकप्रिय है इस प्रोसेस में मेटल सीट को ultrasonic welding के साथ वील्ड किया जाता है और अंत में एक पेपर सीट प्राप्त होती हैं।

Direct energy deposition:  यह भी 3D Printing की एकतानीक़ है। इसका उपयोग अधिक इंडस्ट्री में किया जाता है। यह रैपिड manufacturing application में भी उपयोगी होती है इस तकनीक में 3D printing apparatus को एक मल्टीएक्सिस रोबोटिक अर्म के साथजोड़ा जाता है जिस के साथ एक नोजल लगी हुई होती है जिसका कार्य मेटल पाउडर या वायर को किसी सर्फेस के ऊपर डिपोजिट करना होता है जो अंततः एक सॉलिड ऑब्जेक्ट का निर्मण करता है।

3D printing को जानने के बाद कुछ प्रश्न हमारे मन में उठते हैं जिनका जवाब अब जानने का प्रयास करते हैं:

क्या भारत में 3D प्रिंटिंग होती हैं

आज पूरे विश्व में 3D Printing खासा लोकप्रिय है केवल अमेरिका और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों में हीन हीं 3D Printing आज भारत जैसे विकासशील देशों में भी अपना स्थान बना चुका है। भारत में भी 3D Printing का इस्तेमाल भी प्रारंभ हो चुका है। आज भारत में manufacturing ,  education और मेडिकल के क्षेत्र में इसका बड़ी मात्रा में प्रयोग हो रहा है एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2021 में 3D Printing कामार्केट भारत में साढ़े पांच सौ करोड़ का हो जाएगा।

3D Printing और सामान्य प्रिंटिंग में क्या अंतर हैं

सामान्य प्रिंटिंग टू डायमेंशनल होती है जबकि 3D Printing 3 डाइमेंशनल होती है, अर्थात् किसी समतल सतह पर इसके x-axis, y-axis, और Z-axis को देखा जा सकता है। इसका मतलब ये है की 3D प्रिंट की गई वस्तुओं को सामान्य प्रिंटिंग से बनाई गई वस्तुओं की अपेक्षा चारों ओर से देखी जा सकती है। ये वस्तुएं वास्तविक जीवन की वस्तुओं की भांति ही प्रतीत होती है जिनकी लंबाई चौड़ाई और गहराई सभी चिजो को देखा जा सकता हैं।

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निष्कर्ष

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